विकास के लिए नहीं वर्चस्व के लिए लड़ रहा बिल्हौर

राहुल त्रिपाठी वैसे तो बिल्हौर में आज की सबसे बड़ी खबर चौबेपुर के एक ढाबा पर संर​क्षित खनन माफियाओं के टकराने की है, लेकिन विधानसभा-पंचायत चुनावों में अभी समय है, लेकिन गांव-गांव, क्षेत्र-क्षेत्र नए-नए उम्मीदवार चुनावी मैदान में दम भर रहे हैं। एक दल के कई प्रत्या​शियों ने प्रचार-प्रसार भी आरंभ कर शंखनाद का भी ऐलान किया है। ठीक भी है कई राजनैतिक दलों के पुरोधाओं के चरण-वंदन, गाड़ी खर्चा-चर्चा, मिठाई-उपहार और सैर-सपाटा की जिम्मेदारी ऐसे ही उम्मीदवार के कंधों पर जो है। जिस बिल्हौर में विकास के लिए सक्रिय रहने की उम्मीद है वहीं आज वर्चस्व के लिए झगड़ रहा है। सफेद कपड़ों में मोटी-मोटी सोने के आभूषणों से सुशो​भित, लक्जरी गाड़ियों पर सवार ऐसे लोग इलाकाई छवि को बट्टा लगा रहे हैं। देश ने तो दुनिया में चौथे नंबर की आ​र्थिक व्यवस्था बनकर नाम रोशन किया है, लेकिन बिल्हौर विधानसभा अभी भी बस स्टेशन, गढ्ढादार सड़क, जूझती-पिसती ​शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, दू​​​षित होती गंगा, सिकुड़ती ईशन नदी, ककवन जैसे अविकसित इलाकों गिरफ्त में हैं। किसान की आय दोगुनी होने के नाम पर खाद की मारा-मारी झेल रहे हैं, समितियों में दमखम वाले किसानों को ही खाद की बोरी नसीब हो पा रही है, जबकि चौबेपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानीय राजनीति का असर यह हुआ है कि उद्यमियों ने इलाकाई श्रमिकों के सापेक्ष बाहरी श्रमिकों को पुचकार कर भर्ती करना आरंभ किया है वह भी सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से। 2026 आने में कुछ ही घंटे शेष है एसआईआर के नाम पर कई वोटरों के लिए नया साल नए स्थान पर वोटर बना देगा या फिर हटा देगा। पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में ऐसे कई नामों पर गंभीरता से विचार हो रहा है जिनके नाम कई स्थानों पर राजनैतिक तौर रोशन हैं।आलू किसान दाम ने मिलने से परेशान है और आने वाले नए वर्ष में मौसम पर टकटकी लगाए हैं, आलू निर्यात पर कोई गंभीर चर्चा करने वाला बिल्हौर विधानसभा में खोजे नहीं मिल रहा। जिस कारण कानपुर-फर्रुखाबाद की छोटी लाइन को बड़ी लाइन किया गया उसका रत्ती भर लाभ आज तक आलू किसानों को नहीं मिला। चौबेपुर क्षेत्र से गुजर रही रिंग रोड इलाके के कई गांवों को कई किमी दूर कर देगी और लोगों को कई किमी चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ेगा। टेंशन न ले अच्छी बातें और खबरें भी हैं, पढ़ते रहिए.....

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