विकास के लिए नहीं वर्चस्व के लिए लड़ रहा बिल्हौर
राहुल त्रिपाठी वैसे तो बिल्हौर में आज की सबसे बड़ी खबर चौबेपुर के एक ढाबा पर संरक्षित खनन माफियाओं के टकराने की है, लेकिन विधानसभा-पंचायत चुनावों में अभी समय है, लेकिन गांव-गांव, क्षेत्र-क्षेत्र नए-नए उम्मीदवार चुनावी मैदान में दम भर रहे हैं। एक दल के कई प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार भी आरंभ कर शंखनाद का भी ऐलान किया है। ठीक भी है कई राजनैतिक दलों के पुरोधाओं के चरण-वंदन, गाड़ी खर्चा-चर्चा, मिठाई-उपहार और सैर-सपाटा की जिम्मेदारी ऐसे ही उम्मीदवार के कंधों पर जो है। जिस बिल्हौर में विकास के लिए सक्रिय रहने की उम्मीद है वहीं आज वर्चस्व के लिए झगड़ रहा है। सफेद कपड़ों में मोटी-मोटी सोने के आभूषणों से सुशोभित, लक्जरी गाड़ियों पर सवार ऐसे लोग इलाकाई छवि को बट्टा लगा रहे हैं। देश ने तो दुनिया में चौथे नंबर की आर्थिक व्यवस्था बनकर नाम रोशन किया है, लेकिन बिल्हौर विधानसभा अभी भी बस स्टेशन, गढ्ढादार सड़क, जूझती-पिसती शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, दूषित होती गंगा, सिकुड़ती ईशन नदी, ककवन जैसे अविकसित इलाकों गिरफ्त में हैं। किसान की आय दोगुनी होने के नाम पर खाद की मारा-मारी झेल रहे हैं, समित...