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बिल्हौर के सेनानियों ने खूब लड़ी आजादी की लड़ाई, धरोहरों पर अब अस्तिव का संकट

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मकनपुर, सैबसू, वछना, ककवन, नसिरापुर में कई पुरातन धरोहरों हो रही जीर्णक्षीण सैबसू का पुराना कुआं, तालाब और शिवमंदिर में जुटते ‌थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राहुल त्रिपाठी बिल्हौर। 1857 से पहले ही स्वतंत्रता संग्राम की जो लड़ाई मकनपुर से मजनू शाह मलंग व उनके साथियों द्वारा साधू-सन्यांसी आंदोलन के रूप में शुरू हुई वह धीरे-धीरे जनपद, प्रदेश और देश में फैल गई। इसके बाद 15 अगस्त 1947 आते-आते क्षेत्र के सैबसू, वछना, बकोठी, हलपुरा, खजुरी, राढ़ा, सुजान निवादा, देवीपुर सरायं, नसिरापुर, शिवराजपुर, ककवन के कई गांवों के स्वतंत्रा संग्राम सेनानियों ने अपने-अपने ढंग से आजादी की लड़ाई लड़ी। मकनपुर-सैबसू गांवों में आज भी स्वतंत्रता संग्राम की कई यादें पुरातन धरोहर के रूप में मौजूद हैं। 400 सालों की गुलामी से मुक्ती के लिए बिल्हौर में भी बड़ी संख्या में स्वतंतत्रा संग्राम सेनानियों ने अपना बलिदान दिया है। सैबसू और मकनपुर में अंग्रेजों ने सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में आजादी की मांग करने और फिरंगियों का विरोध करने वाले सेनानियों को फांसी पर लटका दिया था। बिल्हौर के मुनीश्वर दत्त अवस्थी को म...